Product Summery
Author: Nujood Ali
paperback
₹ 225
₹ 250
'मैं एक सीधी-सादी गांव की लड़की हूं, जो हर समय अपने पिता और अपने भाई की आज्ञा का पालन करती आई हूं। बचपन से ही हर बात के लिए सिर्फ 'हां' कहना ही सिखाया गया, लेकिन आज मैंने 'नहीं' कहने का निर्णय लिया है।' 2008 में जब नुजूद अली के पिता ने उसकी शादी उसकी उससे तीन गुना अधिक उम्र के पुरुष से कर दी, तब अचानक उसके बचपन ने दम तोड़ दिया। नुजूद अपने पति द्वारा उस पर किए गए अत्याचारों के बारे में और साहस के साथ घर से भाग जाने के बारे में दृढ़ता से बयान करती है। स्थानीय वकीलों और प्रेस के माध्यम से नुजूद ने अपनी आज़ादी को पुन: हासिल किया। जिस देश में आधे से अधिक लड़कियों की शादी कानूनन उम्र से कम उम्र में कर दी जाती हो, ऐसे यमन में यह एक असाधारण घटना थी। नुजूद ने यमनी रीति-रिवाजों और अपने परिवार की चुनौती का साहस के साथ सामना किया, इस कारण मध्य पूर्व की अन्य युवतियों को भी अपने विवाह को चुनौती देने की प्रेरणा मिली। उसकी शोकांतिका, उसकी विजय और धैर्य की यह अविस्मरणीय कहानी है।