Product Summery
Author: Deva Zinjad
paperback
₹ 459
₹ 499
देवा झिंजाड एक प्रतिभाशाली लेखक तथा कवि हैं। उनका यह उपन्यास ग्रामीण परिवेश की एक यथार्थपरक रचना है। उपन्यास की घटनाओं को स्थापित करते समय उन्होंने घटनास्थल, उसके परिवेश को जानना न केवल आवश्यक समझा, बल्कि लेखन की विश्वसनीयता की दृष्टि से अनिवार्य भी माना। इसलिए वे चिलचिलाती धूप में नंगे पाँव सैकड़ों किलोमीटर उन कई जगहों पर गये, जो कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं की गवाह थीं। उन्होंने उस जगह के भूगोल को नए सिरे से समझा है। इसी कारण उन्होंने कुएँ, बावड़ियाँ, जंगली कंटीली झाड़ियाँ, रास्ते, नदियाँ, गाँव, पहाड़ और यहाँ तक कि दरों से भी अपने पैरों को एक बार फिर से रूबरू कराया है। पैरों में फफोले भी आए और फट भी गए। लेकिन इस बहाने उपन्यास में जो सुनने और देखने को मिलता है, वह अद्भुत है। पढ़ते समय कई बार पाठकों की मुट्ठियाँ अपने आप तन जाती हैं। इससे इस बात का एहसास होता है कि उन्होंने कितने धैर्यपूर्वक उन सब बातों को जाना, समझा और सहा होगा। अपने मंतव्य में लिखा है कि उन्होंने विभिन्न गाँवों के पुराने ठूंठों से बातें कीं। उनके खुरदुरे हाथों को अपने हाथों में लिया और हर घटना को फिर से ज़िंदा करते हुए आगे बढ़ते रहे। यही कारण है कि वे ग्रामीण सामाजिक यथार्थ और सामाजिक चेतना का गहन अन्वेषण करते हुए तीन पीढ़ियों के इस विशाल चित्र को इतनी सरल और सादी भाषा में प्रस्तुत कर पाए। उपन्यास पढ़कर यह अनुभव होता है कि आठ साल का यह लेखन कार्य उनके तन-मन के लिए कितना थका देने वाला रहा होगा। यातनाओं की यह हृदय विदारक कहानी पढ़ने समय मेरे मन में भी उथलपुथल मची हुई थी। माँ को केंद्र में रखकर साहित्य जगत में लाखों रचनाएं लिखी गई होगी लेकिन यह रचना उनमें सबसे अनूठी है। इस उपन्यास का मराठी में महज बीस महीने में 31 संस्करणों का प्रकाशित होना और लेखक को हजारों पाठकों के मंतव्य प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि उपन्यास पाठकों के बीच कितना लोकप्रिय हुआ। देवा झिंजाड जी का अभिनंदन कि ऐसी महत्वपूर्ण रचना आपने हिंदी पाठकों के लिए उपलब्ध कराई। डॉ. गोरख थोरात (महामहिम 'राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी' द्वारा 'अमर उजाला भाषाबंधु' पुरस्कार प्राप्त अनुवादक)